कबीरधाम विशेषकवर्धा

धमाका न्यूज़✍️पुरे जिले में अवैध शराब कोचिंयों की भरमार। आखिर कहाँ से लाते हैं ये शराब? क्या सरकारी ठेके से अधिक कीमत पर फूल क्वांटिटी में खरीदकर मनमाफिक कीमत पर बेचते हैं कोचिये? आखिर कौन है असली गुनहगार?

निखिल सोनी, धमाका न्यूज़✍️

कवर्धा। असामाजिक तत्वों के विरुद्ध एवं अवैध गतिविधियों जैसे अवैध शराब बिक्री एवं परिवहन, जुआ,सट्टा पर प्रभावी नियंत्रण हेतु लगातार सघन अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में कल दो युवक 90 पौव्वा देशी अवैध शराब के साथ पकडे गये।

देशी प्लेन, मसाला की सरकारी ठेके से खरीदी और कीमत 

“धमाका न्यूज़” : अब बात यह उठती है कि ये ये अवैध शराब दोनों आरोपियों ने लाये कहाँ से? क्या इन्होंने अधिक  कीमत में बेचने सरकारी ठेके से तो नहीं ख़रीदे? काफ़ी दिनों से मदिराप्रेमी आवाज उठाते रहे हैं कि सरकारी ठेके से कोचिंयों को अधिक कीमत में देशी प्लेन, मसाला शराब बेचे जाते हैं जिनकी वजह से देसी शराब का हमेशा टोटा रहता है, मज़बूरी में कोचिंयों से खरीदना पड़ता है जिसकी कीमत 80 वाला 120 रु. में और 109 वाला 149 में, तथा गोवा 120 वाला 160 में ख़रीदा जाता है। ग्राहकों के द्वारा अधिक कीमत का कारण पूछने पर कोचिंयों द्वारा कहाँ जाता है ठेके से उन्हें भी अधिक कीमत में शराब दी जाती है।

अब सवाल उठता है ज़ब शराब प्रेमियों की बात सही है तो फिर कोचिये पुरे जिले से पैर पसार चुके हैं और सरकारी ठेके से कुछ पहले और बाद में इनकी दुकानेँ बेरोकटोक चल रही है, यही वे कोचिये हैं जो गाँव -गाँव, मोहल्ले और गलियों में खुलेआम सरकारी ठेके के शराब को अधिक दर पर बेच रहे हैं। सवाल यह उठता है आखिर इन्हें इतनी मात्रा में आखिर शराब कैसे, कौन और किस कीमत पर देते हैं? अच्छा इनका धंधा अभी का तो नहीं होगा वरन पुराने और पेशेवार शराब के अवैध धंधे से जुड़े होंगे जिनकी बदौलत इनकी रोजी रोटी और गुजारा चलता होगा।

फलसफा बात करें तो पुरे जिले में इन जैसे अवैध शराब विक्रेता पुरे जिले में शुमार हैं जो सरकारी ठेके से अधिक कीमत में

शराब फूल क्वांटिटी में खरीदते हैं और उसे ग्राहकों को अपने कीमत पर बेचते हैं। अर्थात आबकारी विभाग के सरकारी ठेके पर यह गोरखधंधा आज का नहीं बरसों से संचालित है और बेचारी पुलिस धरपकड़ में व्यस्त है। कारवाँ यूँ ही चलता रहेगा, लोग पकड़ाते रहेंगे,,, छूटते रहेंगे और ठेके से इन्हें अधिक कीमत में शराब मुहैया कराते रहेंगे, होना जाना खाक कुछ नहीं बस खेला दो दिलों का चलता रहेगा।

Nikhil Soni

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