कवर्धाखास खबरविविध

धमाका न्यूज़✍️कवर्धा के मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्सिंग का खेल: स्थानीय युवाओं के हक पर डाका, कांग्रेस पार्टी आउटसोर्सिंग के खिलाफ उग्र आंदोलन करने को मजबूर होगी: राहुल सिन्हा, मजदूर कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष

कवर्धा जिले में बन रहे बहुप्रतीक्षित मेडिकल कॉलेज को लेकर जहाँ एक ओर जनता के मन में विकास की उम्मीद जगी थी, वहीं अब इस निर्माण कार्य से जुड़ी गंभीर अनियमितताएँ और अन्याय सामने आ रहे हैं।

मजदूर कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष राहुल सिन्हा द्वारा उठाया गया मुद्दा न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है*, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस प्रकार प्रदेश की भाजपा सरकार स्थानीय युवाओं और श्रमिकों के अधिकारों की अनदेखी कर रही है।

मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट से स्वाभाविक रूप से यह उम्मीद रहती है कि इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे। लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। निर्माण स्थल को चारों ओर से टीन शेड लगाकर बंद कर दिया गया है, जिससे पारदर्शिता पूरी तरह समाप्त हो गई है।

स्थानीय लोगों को अंदर जाने तक की अनुमति नहीं दी जा रही, मानो कोई गोपनीय काम चल रहा हो। यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर ऐसा क्या है जिसे जनता से छिपाया जा रहा है?

सबसे गंभीर बात यह है कि इस प्रोजेक्ट में बाहरी मजदूरों, इंजीनियरों और कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जा रही है। *कवर्धा जिले के लाखों बेरोजगार युवा, जो रोज़गार की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं

, उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है। यह न केवल अन्याय है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को कमजोर करने वाला कदम भी है। जब अपने ही जिले के लोग काम के लिए भटक रहे हों और बाहर से मजदूर बुलाकर काम कराया जाए, तो यह साफ तौर पर सरकार की गलत नीतियों और ठेकेदारों की मनमानी को दर्शाता है।

प्रदेश की भाजपा सरकार अक्सर विकास और रोजगार के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है। क्या यही “सुशासन” है, जहाँ अपने ही प्रदेश के युवाओं को रोजगार से वंचित कर दिया जाए? क्या सरकार का कर्तव्य नहीं है कि वह स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दे?

यह भी चिंता का विषय है कि इस पूरे प्रोजेक्ट में पारदर्शिता का अभाव है। यदि सब कुछ नियमों के तहत हो रहा है, तो फिर निर्माण स्थल को इस तरह से क्यों छिपाया जा रहा है? क्या इसमें कोई भ्रष्टाचार या अनियमितता छिपाई जा रही है? ये सवाल आज हर जागरूक नागरिक के मन में उठ रहे हैं।

कांग्रेस पार्टी और मजदूर कांग्रेस इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है। यह केवल रोजगार का सवाल नहीं है, बल्कि यह स्थानीय अधिकारों, सम्मान और न्याय का भी मुद्दा है। अगर सरकार और प्रशासन इस पर जल्द कोई ठोस कार्रवाई नहीं करते हैं, तो कांग्रेस पार्टी आउटसोर्सिंग के खिलाफ उग्र आंदोलन करने को मजबूर होगी।

यह आंदोलन केवल एक विरोध नहीं होगा, बल्कि यह उन लाखों युवाओं और श्रमिकों की आवाज़ बनेगा, जिन्हें उनके हक से वंचित किया जा रहा है। सरकार को यह समझना होगा कि विकास का मतलब केवल इमारतें खड़ी करना नहीं होता, बल्कि उसमें स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।

अब समय आ गया है कि सरकार जवाब दे — आखिर कब तक स्थानीय युवाओं के हक पर इस तरह से डाका डाला जाता रहेगा?

Nikhil Soni

Related Articles

Back to top button