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धमाका न्यूज़✍️आजादी के 78 बरस और राज्य स्थापना की रजत जयंती के बाद जरा तरक्की का सफर देखिये, ढोल में कितना पोल है एक नजर तो देखिये: पत्रकार निखिलेश सोनी प्रतीक

निखिलेश सोनी प्रतीक की कलम से ✍️

कबीरधाम जिला के रेंगाखार जंगल क्षेत्र के नगवाही गांव का ग्रामीण समलू मरकाम अपनी पत्नी जो कैंसर की मरीज है को मोटर साइकिल के पीछे हिस्से में लकड़ी का पाटा बनाकर, उसमें लिटाकर, उसे बांधकर अस्पताल की ओर भागता हुआ, इस उम्मीद में कि उसकी जीवन संगिनी का ईलाज हो जाये। बेबसी, लाचारी और गरीबी में जीते इस इंसान की व्यथा इस तस्वीर को देख करीब से महसूस किया जा सकता है किन्तु तमाम व्यवस्था  को चुल्लू भर पानी में डूब जाने वाला यह दृश्य सरकार की बदतर योजनाओं, प्रशासन की भ्रष्ट कार्यप्रणाली, सामाजिक संस्थाओं की कागज पर सेवा का ढिंढोरा पीटे जाने को बयां करता है। आजादी के 78 साल बाद तथा छत्तीसगढ़ राज्य के स्थापना के रजत महोत्सव के बाद आज भी 2.50 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश के लाखों लोग जानवर की जिंदगी जीने को विवश हैं, सरकार के मंत्री, विधायक इन गरीबों का प्रदर्शन करने इनके साथ फोटो खींचाने, इनके घरों में फाइव स्टार होटल ढाबों के पार्शल खाने को खाते प्रचार प्रसार करने में उत्सुक नजर जरूर आते हैं किन्तु इनके जीवन स्तर सुधारने का कोई सरकारी इंतजाम नहीं करते, इनके नाम पर करोड़ों के फण्ड अधिकारी-नेता मिलकर खा जाते हैं, यह रिवाज बाकायदा चलता रहता है किन्तु इनका कभी भला हो जाये ऐसे माई का लाल आज तक सरकार में देखने और सुनने को नहीं मिला। लानत है सरकार और सरकारी तंत्र का कि आज बदलते और विकसित समय में गरीबों की यह भयावह दशा देखकर।

बहरहाल कबीरधाम जिले के नगवाही गांव से निकले इस दृश्य को देख मन झकझोर जाता हैं, आँखें नम हो जाती है, गुस्सा उफान पर आ जाता है उन लोगों पर जिनके बद इंतजामी के कारण किसी गरीब को मजबूर होना पड़ता है। सत्ता के ऐशों आराम में मदमस्त सियासतदारों को शर्म आनी चाहिए, नाहक और बेवजह तरक्की का बाजा बजाने वाले लोगों को चाहिए जरा आत्म मंथन करें, जरा इस दुखद व्यवस्था का अवलोकन करें, जरा अपनी नाकामी को परखे।

अंत में-
भ्रष्टाचार के लिफाफे बांटकर गुनाह तो दबा सकते हो जनाब,,,,
लेकिन ऊपर वाले को कभी तो देना ही होगा गुनाह का जवाब।✍️

Nikhil Soni

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