धमाका न्यूज़✍️रोजगार आजीविका एवं जल संरक्षण का केन्द्र बनेगा आजीविका डबरी। महात्मा गांधी नरेगा से स्वीकृत हुआ 307 आजीविका डबरी।

lमत्स्य पालन और सिचाई के साथ आजीविका संवर्द्धन को मिलेगा बढ़ावा।
कवर्धा, 06/01/2026- जिले में जल संरक्षण सिंचाई एवं आजीविका को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास हो रहे है। इसी क्रम में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी येाजना अंतर्गत ग्रामीणों को रोजगार देते हुए जल संरक्षण के साथ आजीविका संवर्धन के लिए आजीविका डबरी बड़ी मात्रा में स्वीकृत कर निर्माण किया जा रहा है। इसका निर्माण पानी के विभिन्न स्त्रोत स्थलों में किया जा रहा है, जिसमें विशेष रूप से खेतो के निचले स्तर पर जहां पानी दूसरे खेतो में बह जाता है पानी को रोकने के लिए एवं अन्य ऊचे स्थानों से बहते पानी को रोकने के लिए तथा हितग्राहियों द्वारा मांग किये गये स्थानों पर बनाया जा रहा है। आजीविका डबरी की औसतन लंबाई एवं चौड़ाई 20 मिटर तथा गहराई 3 मिटर रखा जा रहा है।महात्मा गांधी नरेगा योजना से अब-तक 5 करोड़ 64 लाख 88 हजार रूपये की लागत से इस वित्तीय वर्ष में अब तक 307 आजीविका डबरी स्वीकृत किया गया है। आजीविका डबरी बन जाने से जिले के ग्रामीणों को अनेको फायदे होंगे। डबरी निर्माण से जल संरक्षण होगा जो भू-जल स्तर को ऊपर उठाने में मदद करेगा। इससे आस पास के बोरवेल्स एवं हैण्ड पंप में पहले से और बेहतर पानी उपलब्ध होगा। डबरी में हितग्राही मत्स्य पालन का व्यवसाय कर सकेगा जिसमें विभागीय अभिसरण द्वारा मत्स्य पालन विभाग से मिनी कीट सहित तकनिकी जानकारी हितग्राहियों को दी जायेगी। अनुमान के मुताबिक 10 डिसमिल क्षेत्र में निर्मित डबरी से मत्स्य पालन करने पर अनुमानित 40 से 50 हजार रूपये की आमदनी आसानी से की जा सकती है। डबरी के मेढ़ में नमी होने से साग-सब्जीयों, फलों, तिलहन फसलों का उत्पादन भी आसानी से हो सकेगा। यह फसले हितग्राही के परिवार में उपयोग होने के साथ सब्जीयों का विक्रय बाजार में आसानी से किया जा सकेगा जो हितग्राही के लिए अलग से आमदनी का जरिया बनेगा। इसके साथ ही आजीविका डबरी में उपलब्ध पानी से खेतो की सिंचाई भी आसानी से की जा सकेगी।
इस संबंध में चर्चा करते हुए कलेक्टर कबीरधाम श्री गोपाल वर्मा ने बताया कि वनांचल क्षेत्र से लेकर मैदानी क्षेत्रो तक अभियान के रूप में आजीविका डबरी की स्वीकृति ग्रामीणों की मांग पर हो रहा है। क्योंकि इसके अनेको फायदे से सभी परिचित है। महात्मा गांधी नरेगा योजना से निर्मित हो रहे डबरी से एक ओर ग्रामीणों को बड़ी मात्रा में रोजगार मिल रहा है तो वही दूसरी ओर आजीविका के नये साधन विकसित हो रहे है। जिससे प्राकृतिक वातावरण को भी बहुत फायदा होगा। वर्तमान में स्वीकृत किये गये आजीविका डबरी का निर्माण कार्य तेज गती से चल रहा है।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कबीरधाम श्री अजय कुमार त्रिपाठी ने जानकारी देते हुए बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में ग्रामीणों की मांग पर 307 डबरी स्वीकृत किया जा चूका है इनमें से बहुत से डबरी का निर्माण कार्य ग्रामीणों द्वारा प्रारंभ कर दिया गया है। एक डबरी निर्माण से 642 मानव दिवस का रोजगार ग्रामीणों को मिलना संभावित है और इस तरह अब तक स्वीकृत किये गये सभी 307 आजीविका डबरी में लगभग 197056 मानव दिवस का रोजगार ग्रामीणो को प्राप्त होगा।
*आजीविका एवं जल संरक्षण के लिए आजीविका डबरी बनेगा मिल का पत्थर।*
उल्लेखनीय है कि महात्मा गांधी नरेगा योजना से निर्मित हो रहे आजीविका डबरी ग्रामीणों को रोजगार के नए अवसर प्रदान कर रहा है अब तक स्वीकृत हुए डबरी में औसतन 197056 मानव दिवस का रोजगार जिले के ग्रामीणों को मिलेगा। इसके साथ ही एक डाबरी में 864 घन मीटर पानी रुकेगा इस तरह 307 आजीविका डाबरी में 264020 घन मीटर जल भराव होगा जो जल संरक्षण की दिशा में बहुत महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही सभी डबरी बन जाने से हितग्राहियों को आजीविका से संबंधित अनेक गतिविधियों का लाभ मिलेगा जिसमे मुख्य रूप से मत्स्य पालन शामिल है। विभागीय अभिसरण से मत्स्य पालन के लिए बीज और तकनीकी मार्गदर्शन तथा उद्यानकी फसलों के लिए विभाग से सहायता प्राप्त होगी।




